Search
  • Prakshi al-Shaeirah

कली

Updated: Sep 26

नारी का जीवन सात्त्विक रूप से एक संघर्ष है।  हम सभी अपनी - अपनी ज़िन्दगी जीते हैं।  परन्तु वो एक नारी ही होती है जो अपनी  और अपनों, दोनों की  ज़िन्दगी जीती है। कली सी  उसकी कोमल  करुणपूर्ण वृत्ति , हम सभी के जीवन को स्वर्ग बनाती है।  वास्तव में नारी इस संसार की सबसे बड़ी  योद्धा है। और इस योद्धा का  अपने  सम्मान के लिए  क्या संघर्ष है , यह कविता बतलाती है।  

कली

किसी ने उस कली को खिलते देखा 

सोचा इसमें कहाँ  ज़ोर है 

उसे छू कर ,तोड़ना चाहा 

तोड़ कर मुँह फेरना चाहा 

सोचा, यह वो तिनका है 

जिसमें कोई बात नहीं 

पर मत भूलना ,

यह कली भी काटों के साथ  खिलती है 

कली के प्रति न दिखा मुझे ,

वो दया , सम्मान , मानवता का गहना 

पर दिखा मुझे वो उस वन में ,

जो आज कहीं खो सा गया है इस जन में 


___प्राक्षी कुमारी 

Join 10 other members by subscribing to my newsletter and enjoying a new poem every wednesday !

I'm a paragraph. Click here to add your own text and edit me. It's easy.

  • Pinterest
  • Instagram

   Rejoice the power of words 

My mailing house: