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  • Prakshi al-Shaeirah

हवा

Updated: May 28





जीवन  में  बहुत लोगों से हमारा मिलना होता है। जिनमें  से कुछ हमारे  जीवन का  महत्वपूर्ण  हिस्सा  बन  जाते हैं।  पर यह जायज़ है , औरों की तरह  उनका भी साथ हमारे जीवन के हर अवयवों  में  हो  यह  ज़रूरी नहीं।लोगों का आना-जाना जीवन में कुछ यूँ लगा रहता है , मानो जैसे हवा हो। जो क्षण भर में आती है , फिर चली जाती है।  यह मानव रुपी हवा कविता में इसी बात का मर्म समझाती  है।  

हवा  

हवा  बनकर  आते  हैं हवा बनकर चले जाते हैं खुश-नसीब हैं वो , जो इस झोंके का सदा साथ पाते हैं हवा के आने से मन में जगी एक उमंग ,एक आशा पर हवा के जाते ही , उसी मन में छा गई निराशा फिर आई हवा मिलने , पुनः उर  में खिली प्रसन्नत्ता की वो कली पर उस कली का मुरझाना तय था क्यूंकि यह हवा का झोंका था आना और जाना, यही इसका लय था   __ प्राक्षी कुमारी

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