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  • Prakshi al-Shaeirah

मन

Updated: Sep 26

 चित्त हमारी आत्मा का अन्तःस्थ  परन्तु  अद्भुत अंग है। चित्त , मन , हृदय ,हमारी आत्मा के इस अविभाज्य अंग को आप  अनगिनत शब्दों से परिभाषित कर  सकते हैं। इसके विषय में सुनना जितना सरल लगता है, उतना ही कठिन है इसे समझना।  मन 

मन के वो गात  मन के वो हालात ,  शायद ,मन ही  जानता है  न जाने ये  मन किसका साथ मांगता है 

यूँ तो निराशा ,दुविधा के उस वन में  अकेला निकल जाता है , पर ऊपर नज़र घुमाने पर  उस चन्द्रमा का साथ पाता है  इस मन की बात  तो बस यह मन ही जनता है , मन के वो गात  मन के वो हालात  शायद , मन ही जानता  है  ___प्राक्षी  कुमारी 

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